असम और नागालैंड की सीमा पर स्थित मेरापानी के नेघेरीबिल क्षेत्र में शनिवार को प्रशासन ने 59 परिवारों के घर बुलडोजर से ध्वस्त कर दिए। दयांग आरक्षित वन (Dayang Reserved Forest) की अतिक्रमित भूमि खाली कराने के इस संयुक्त अभियान में दोनों राज्यों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रभावित परिवारों के आशियाने मलबे में तब्दील हो गए और इलाके की एकमात्र मस्जिद भी गिरा दी गई।
घटना की पृष्ठभूमि
अगस्त 2025 में गोलाघाट जिले के नेघेरीबिल में कुल 205 परिवारों को बेदखली नोटिस जारी किए गए थे। पहले चरण में 146 परिवारों के घर हटाए गए। शेष 59 परिवारों ने अदालत से अंतरिम राहत हासिल कर ली थी। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को इन परिवारों को 60 दिन का अतिरिक्त समय दिया। समय सीमा खत्म होने के बाद असम और नागालैंड सरकारों के संयुक्त अभियान में 17 अक्टूबर 2026 को ये 59 घर ध्वस्त किए गए।
असम प्रशासन का कहना है कि यह भूमि दयांग आरक्षित वन का हिस्सा है और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्रवाई की गई।
संयुक्त अभियान और मौजूदा तनाव
नागालैंड की ओर से वोखा जिला उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और नागरिक समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे। असम की ओर से वन विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात थे। कार्रवाई शांतिपूर्ण रही, लेकिन बेदखली के तुरंत बाद नागा समूहों ने खाली भूमि पर दावा ठोक दिया।
लोथा लोअर रेंज पब्लिक ऑर्गनाइजेशन (LLRPO) और मेकिरांग गांव परिषद का कहना है कि यह क्षेत्र नागालैंड के मेकिरांग, लॉन्गायिम और लियो-लॉन्गचुम गांवों का हिस्सा है। उन्होंने दोनों राज्य सरकारों से सीमा विवाद का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
Current Situation
घर उजड़ने के बाद परिवारों के पास सिर्फ मलबा और आंसू रह गए हैं। कई परिवार वर्षों से यहां रह रहे थे। पुनर्वास की कोई स्पष्ट घोषणा अभी तक नहीं हुई है। मेकिरांग, लियो-लॉन्गचुम और लॉन्गायिम गांवों में सड़क संपर्क की कमी भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रभावित परिवार अस्थायी व्यवस्था की तलाश में हैं। असम-नागालैंड सीमा विवाद फिर से चर्चा में आ गया है। दोनों राज्य सरकारों के बीच समन्वय और स्थायी समाधान की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है।
घर उजाड़ना आसान है, लेकिन किसी की पूरी दुनिया दोबारा बसाना नहीं। ये परिवार अब पुनर्वास और भविष्य की अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।